एक भिखारी पिछले तीस वर्ष से एक सड़क के किनारे बैठ कर भीख माँगा करता था .

एक दिन एक अजनबी उसके सामने से गुज़रा . भिखारी ने अपना हाथ उस अजनबी के सामने फैलाते हुए , चेहरे पर बनावटी दुःख प्रकट करते हुए याचना की , ” लाचार को कुछ पैसा दे दो बाबूजी ? ” अजनबी ने सपाट शब्दों में कहा , ” मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं है . ” फिर वह भिखारी की ओर मुखातिब हुआ और बोला , “ तुम जिस चीज के पास बैठे हो , वह क्या है ?

” “ कुछ भी तो नहीं ! ” भिखारी ने रूखेपन से जवाब देते हुए कहा , ” सिर्फ लकड़ी की पुरानी पेटी है . और , जहाँ तक मुझे याद है , मैं वर्षों से इसी पेटी पर बैठता आ रहा हूँ ” क्या कभी खोल कर देखा है , इसके अन्दर क्या भरा है ? ” अजनबी ने कौतूहल से पूछा ! ” नहीं ! ” , भिखारी ने जवाब देते हुए कहा , ” मुझे पता है कि उसमें कुछ नहीं है , तो फिर उसे खोल कर देखने से क्या फ़ायदा ? ‘ अजनबी ने जोर दे कर कहा , “? उस पेटी को इसी पल खोल कर देखो , अन्दर क्या भरा है  भिखारीने कोशिश करके वर्षों से जंग खायी उस पेटी को खोला और , पेटी में भरी स्वर्ण – मुद्राओं को देख कर सहसा उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ ; वह आश्चर्य और उल्लास से भर कर नाचने लगा ।

तो दोस्तो में भी वैसा ही एक अजनबी हूँ । मेरे पास ऐसा कुछ भी नहीं है , जो मै आपको दे सकता हूं। पर हाँ , तुम्हें अपने ही अन्तर में झाकने के लिए प्रेरित कर सकता हूँ।
उस भिखारी के समान तुम्हें किसी लकड़ी की पेटी में नहीं झांकना है ; तुम्हें अपने अंदर में झाँकना है , जो तुम्हारे बहुत करीब है ।

किसी जिज्ञासु की ओर देखते हुए … तुमने अभी जो कहा , ” मैं कोई भिखारी नहीं हूँ ” वह मैंने सुना , वास्तविकता यह है कि जो अपनी असली सम्पदा , अपने सच्चे वैभव को नहीं जानते हैं जो उनके अपने अन्तर का उल्लास , उनकी अपनी अन्तरात्मा की प्रभा और आत्मा की गहन व चिरस्थायी प्रशान्ति है – वे सब भिखारी ही तो हैं , वे सुख , भोग – विलास के तुच्छ आनन्द को पाने के लिए खुद की पहचान व अस्तित्व को बनाये रखने के लिए , सुरक्षा और प्रेम के लिए बाहर दर – दर भटकते रहते हैं , जबकि उनके अपने अन्दर एक ऐसा खजाना छिपा है , जो उन्हें उपरोक्त सब कुछ देने के साथ – साथ संसार की महानतम प्राप्ति भी करा सकता है ।

आशा करता हूं कि आपको हमारी कहानी अच्छी लगी हो, इसे अपने दोस्तो के साथ जरूर शेयर करना।

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