फोर्ड मोटर के मालिक हेनरी फोर्ड दुनिया के चुनिन्दा धनी व्यक्तियों में शुमार किए जाते थे , उनकी गाड़ी की प्रशंसा दुनिया भर में होती थी ।

एक बार एक भारतीय उद्योगपति भारत में मोटर कारखाना लगाने से पहले फोर्ड से सलाह करने अमेरिका गए । भारतीय उद्योगपति ने अमेरिका पहुंचकर हेनरी फोर्ड से मिलने का समय मांगा । फोर्ड ने कहा , ” दिन में मैं आपके लिए अधिक समय नहीं निकाल पाऊँगा , इसलिए आप शाम छह बजे आ जाइए ।

” भारतीय उद्योगपति उनके घर पहुंचे । वहाँ एक आदमी बर्तन साफ कर रहा था । उन्होंने उससे कहा , ‘ मुझे हेनरी साहब से मिलना है । ‘ वह आदमी उन्हें बैठक में बैठाकर अन्दर चला गया । थोड़ी देर बाद उसने उनके सामने आकर कहा , ” तो आप है वह भारतीय उद्योगपति । मुझे हेनरी कहते है । “
भारतीय उद्योगपति को असमंजस में देखकर हेनरी ने कहा , ” लगता है आपको मेरे हेनरी होने पर सन्देह हो रहा है । ” भारतीय उद्योगपति ने सकपका कर कहा , ” हाँ सर , अभी आप को एक नौकर का काम करते देखकर ताज्जुब हुआ । इतनी बड़ी कम्पनी के मालिक को बर्तन साफ करते देखकर किसी को भी भ्रम पैदा हो सकता है । यह काम तो नौकरों का है । “

हेनरी ने कहा , ” शुरूआत में मैं भी एक साधारण इन्सान था । अपना काम खुद करता था । अपने हाथ से किए गए कठोर परिश्रम का ही फल है कि आज मैं फोर्ड मोटर का मालिक हूँ । मैं अपने अतीत को भूल न जाऊँ और मुझे लोग बड़ा आदमी न समझने लगे , इसलिए मैं अपने सभी काम अपने हाथ से करता हूँ । अपना काम करने में मुझे किसी तरह की शर्मिंदगी और झिझक नहीं होती ।

” भारतीय उद्योगपति उठ खड़े हो गए और बोले , ” सर ! अब मैं चलता हूँ । मैं जिस मकसद से आपके पास आया था , वह एक मिनट में ही पूरा हो गया । मेरी समझ में आ गया कि सफलता की कुंजी दूसरों पर भरोसा करने में नहीं , स्वयं पर भरोसा करने में है ।

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