माता-पिता अपने बच्चों से केवल सबसे अच्छे बर्ताव करना चाहते हैं लेकिन कभी-कभी, वे अनायास ही उन्हें अपने प्यार और अति उत्साह के साथ चोट भी पहुंचाते हैं। वे अच्छे – बुरे ( मिक्स ) संकेत भेज सकते हैं, अपने बच्चों की राय को अनदेखा कर सकते हैं, या उन नियमों को तोड़ सकते हैं जो उन्होंने खुद के साथ अपने परिवार के लिए बनाए थे । और यहां तक ​​कि कभी कबार हमारे वयस्क भी अपने और अपने परिवार के लोगों के फायदे के लिए दूसरों के साथ भी इस तरह की कार्यो को भ्रमित और अनिश्चित होकर करते है कि उन्हें दुनिया में ऐसे ही कार्य करना चाहिए ।

हम ” KanhaBuzz “ पर कुछ स्पष्ट स्थितियों पर प्रकाश डालना चाहते हैं जब वयस्क लोग पाखंडी की तरह काम करते हैं और यहां तक ​​कि इसे नोटिस भी नहीं करते हैं।

1.”मैं अपने फोन पर मुझे चाहे जितने घंटे खर्च कर सकता हूं, लेकिन तुम नहीं कर सकते ।

कभी कभी माता पिता अपना हर रोज का महत्वपूर्ण काम ख़तम करने के बाद अपने लैपटॉप, टैबलेट, टीवी या फिर मोबाइल इंटरनेट का उपयोग करके, हर दिन 3 से 4 घंटे खर्च कर देते है। बच्चों को बहुत समय तक मोबाइल पर इंटरनेट इस्तमाल करने ना देना पूरी तरह से स्वस्थ और अच्छी बात है , पर वयस्कों को भी खुद पर ध्यान देना चाहिए। अन्यथा, जब कोई माता-पिता पूरे दिन सोशल मीडिया की जांच करते समय खुद को मनोरंजन करने में लगे रहते है और बच्चे को बताने की कोशिश करते है तो ये बहुत पाखंडी लग सकता है,

2. ” मैं कब भूखा हूं, ये में तय कर सकता हूं , ये तुम मुझे मत सिखाओ ।”


जबकि स्वस्थ भोजन महत्वपूर्ण है, हम सभी की अपनी प्राथमिकताएं हैं और कभी-कभी, हम एक निश्चित भोजन खाने की तरह महसूस नहीं करते हैं। वयस्कों के पास जब चाहें खुद का इलाज करने का विकल्प होता है, चाहे वे उपवास कर रहे हो या यदि वे भूखे नहीं हैं, तो दोपहर का भोजन छोड़ रहे हो। लेकिन बच्चे इस आज़ादी से वंचित हैं और हमेशा उन्हें अपने माता-पिता के नियमों का पालन करना पड़ता है, भले ही वयस्क हमेशा उनका पालन नहीं करते ।

3. ” तुमको अकेले ही सोना चाहिए, लेकिन मुझे नहीं । “

कुछ माता-पिता ओं का ये मानना है कि सह-स्लीपिंग बच्चों की आजादी को बर्बाद कर देती है, इसलिए वे सोने तक उनके साथ झूठ बोलने से इनकार करते हैं । लेकिन सवाल ये है कि, वयस्क एक ही कमरे में क्यों सोते हैं, और क्यों बच्चों को अलग सो जाने के लिए बोलते है? कुछ मनोवैज्ञानिकों का सुझाव है कि अपने बच्चों को सोने में मदद करने में, एक मजबूत भावनात्मक बंधन बनाने में मदद मिलती है और बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार भी होता है।

 

4. “तुम मुझसे झूठ नहीं बोल सकते, लेकिन मैं बोल सकता हूं।

माता-पिता अपने बच्चों को हमेशा सच्चाई बताना और उनके व्यवहार के परिणामों को स्वीकार करने के लिए सिखाते हैं। लेकिन कभी-कभी वे इस नियम को खुद के लिए तोड़ देते हैं। सफेद झूठ बोलना, सच्चाई को हराकर, या कुछ जानकारी छुपाएं रखना, क्योंकि “उन्हें लगता है कि सच बताने से कुछ भी नहीं बदलेगा, कुछ फायदा नहीं होगा ” पर बच्चों की आंखों में ये बाते बहुत पाखंडी लग सकती है।

5. “मुझे बहुत गर्मी होगी या बहुत ठंड लगेगी ये में तय कर लूंगा , ये बताना तुम्हारा काम नहीं। “

मौसम के अनुसार अपने बच्चे को ड्रेसिंग करने की बात आती है तब माता-पिता कुछ जादा ही सुरक्षात्मक होते हैं। वे इस बात पर विचार नहीं करते कि बच्चा वास्तव में कैसा महसूस करता है और अक्सर अपनी धारणाओं के आधार पर अनुमान लगाकर उनको वैसे ही कपड़े पहन ने को बोलते है । लेकिन तब बच्चे उनको वे पोशाक पहन ने को मना करने से नहीं रोक पाते है, जो वास्तव में मौसम के अनुरूप नहीं होते हैं जब यह उनके लिए सुविधाजनक होता है।

6. तुमको ये शेयर करना होगा, लेकिन मैं नही कर सकता।”

माता-पिता अक्सर अपने बच्चों कोअपने भाई बहन के साथ अपने खिलौनों को बाटने को कहते है और कुछ स्थितियों के साथ मत बाटने के लिए सिखाते हैं जो उनके लिए अप्रिय है। लेकिन जब बात आती है कि बच्चे अपने माता पिता के वस्तु ओंं को मांगने जाते है तब वे उन्हें साफ केह देते है कि ” ये मेरी चीजे है उन्हें मै तुम्हे नहीं दे सकता ,उसे हात मत लगाओ आदि । बच्चे अलग-अलग व्यक्तियों को अपनी जरूरतों और विचारों के साथ रखते हैं, इसलिए स्वस्थ सीमाएं स्थापित करना और उनकी राय को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।

7. तुमको वो काम तुरंत करना चाहिए जो मैं कहता हूं, ना कि तुम्हारे काम मुझे करना चाहिए ।

माता-पिता उम्मीद करते हैं कि उनके बच्चे तुरंत अपने आदेशों को पालन करे , भले ही बच्चा पहले से क्या कर रहा था। अपने बच्चे की राय को अनदेखा कर के उन्हें ये सोचने के लिए कि उनकी इच्छाएं और राय महत्वपूर्ण नहीं हैं। इससे उनके बच्चे अनुशासित नहीं हो जाते , लेकिन उससे उन्हें और क्रोध आ जाता है ।

8. ” मुझे तुम्हारी भावनाओं की परवाह नहीं है, लेकिन तुमको मेरी भावनाओं की परवाह करनी चाहिए।”

बच्चों के  लिए उनकी भावनाओं को पहचानना और उन पर काम करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन ये माता-पिता का काम है कि वे उन्हें नेविगेट करें । लेकिन बच्चों की भावनाओं को अनदेखा करना या उन्हें एक निश्चित तरीके से महसूस करने के लिए दंडित करना, ये काम नहीं करेगा। विशेष रूप से यदि वयस्क समय-समय पर भावनात्मक और “अनुचित” अभिनय करके कुछ बुरे तरह से बच्चों पर घुस्सा निकालते है।

9. ” तुम्हे हमेशा और भी बेहतर होने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन मुझे नही। “

माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे जीवन में सफल हों और उन्हें अध्ययन करने और नई चीजों की कोशिश करने के लिए प्रेरित करें। और जब बच्चा ऊब और बोर हो जाता है, तो माता-पिता शिकायतों के साथ आते है कि उन्हें वास्तव में अपने जीवन में क्यों अच्छा काम करने की आवश्यकता है। लेकिन वे अक्सर अपने बच्चों के पास गलत उदाहरण ले के आते थे और उनके द्वारा कहे गये कथन बच्चों के बिल्कुल विपरीत होते थे।

10. ” तुम्हे खुद को व्यक्त करने से डरना नहीं चाहिए, लेकिन मैं जनता की राय से डरती हूं। “

माता पिता अक्सर अपने बच्चों को अपने सबसे अच्छे संस्कार के रूप में देखते हैं, इसलिए वे उन्हें बिना डरे जो चाहे करने के लिए प्रेरित करते हैं। हालांकि बच्चे को उनके सच्चे आत्मज्ञान होने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है, समस्या ये है कि माता-पिता कभी-कभी अपने बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीद करते हैं के उनको पता होना चाहिए कि दुनिया कैसे काम करती है और उन्हें दिखाती है कि वे उदाहरण के तौर पर इसी तरह की स्थिति में उन्हें क्या करना हैं।
तो ये थे कुछ 10 ” पाखंडी ” प्रकार जो माता-पिता अपने बच्चों को जाने या अनजाने में सीखा देते हैं ।

क्या आप भी ऐसे कोई उदाहरणों को जानते हैं कि जिसे माता-पिता अपने बच्चों के साथ जाने या अनजाने मै सीखा देते है? तो नीचे कमेंट में बताइए ।
आशा करता हूं कि आपको हमारा ये लेख अच्छा लगा हो, इसे अपने दोस्तो के साथ जरूर शेयर करना।
                                                                  Thank you

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